Shital Jinvar Sevna (Hindi Lyrics) Jain Stavan



शीतल जिम शशीबिंब हो ससनेही;
मूरति मारे मन वसी,साहेबजी …
सापुरीसाशुं गोठडी साहेबजी मोटो ते आलालुंब हो. ससनेही … १

खीण एक मुजने न वीसरे साहेबजी, तुमगुण परम अनंत हो ससनेही;
देव अवरने शुं करुं साहेबजी, भेट थई भगवंत हो. ससनेही… २ 

तुमे छो मुगट त्रिहुं लोकना साहेबजी हुं तुम पगनी खेह हो ससनेही
तुमे छो सघन ऋतु मेहुलो साहेबजी हुं पश्चिम दिशि त्रेह हो ससनेही… ३

नीरागी प्रभु रीझवुं, साहेबजी ते गुण नहि मुजमांही हो ससनेही;
सत्र गुरु गुरुता साहमुं जुए साहेबजी , सारा गुरुता ते मूके नही हो. ससनेही… ४

मोटासेती बरोबरी, साहेबजी सेवक किणविध थाय हो; 
आसंगो किम कीजीए, साहेबजी तिहां रह्या आलुभाय हो. ससनेही…५

जगगुरु करुणा कीजीए साहेबजी न लख्यो आभार विचार हो ससनेही
मुजने राज, निवाजशो, साहेबजी तो कुण वारणहार हो ? ससनेही… ६

ओलग अनुभव भावथी, साहेबजी जाणो जाण सुजाण हो; ससनेही
मोहन कहे कवि रूपनो, साहेबजी  जिनजी जीवन प्राण हो. ससनेही…  ७

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