सर्व प्रथम प्रभु की अष्टप्रकारी पूजा अथवा द्रव्य पूजा करने के बाद किये जाने वाली भाव पूजा याने चैत्यवंदन।
चैत्यवंदन की विधि निचे क्रमशः दी गई है, आप भी लाभ ले और दुसरो को भी भेजे ताकि जिन्हे चैत्यवंदन न आता हो तो यहाँ से देख कर के प्रभु की भाव पूजा रूप चैत्यवंदन कर सके
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